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Gold Import Duty Hike 2026: सरकार ने 6% से 15% किया शुल्क, अब 18.4% पर पहुंचा टैक्स – PM मोदी की अपील के बाद सोना ₹27,000 प्रति 10 ग्राम महंगा

Updated: 5,13,2026

By Akash Maurya

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Bharat सरकार ने 13 मई 2026 की मध्यरात्रि दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर सोने और चांदी के आयात शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी कर दी. पहले जहां बेसिक कस्टम ड्यूटी 5%, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) 1% और IGST 3% था, जिससे प्रभावी शुल्क लगभग 9.2% रहता था. अब बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 10% और AIDC बढ़ाकर 5% कर दिया गया है.

IGST (3%) मिलाकर प्रभावी आयात शुल्क 18.4% हो गया है – यानी दोगुने से भी अधिक. सरकार ने यह कदम वेस्ट एशिया संकट, बढ़ते कच्चे तेल के दामों, गिरते रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के मद्देनजर उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन (हैदराबाद) में सोने की खरीदारी कम करने की अपील के ठीक बाद यह फैसला आया है.

बाजार में इसकी तत्काल प्रतिक्रिया दिखी – दिल्ली में सोना ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर ₹1,61,110 पर पहुंच गया, यानी लगभग ₹4,300 की एक दिन में बढ़त. IBJA के अनुसार, नया प्रभावी शुल्क सोने को प्रति 10 ग्राम लगभग ₹27,000 अधिक महंगा कर देगा (पहले ₹13,500 से बढ़कर अब ₹40,500 के आसपास). इस लेख में हम इस फैसले के कारण, आर्थिक प्रभाव, उद्योग की प्रतिक्रिया, और आपके निवेश पर असर का विश्लेषण करेंगे.

Key Takeaways On Gold Import Duty Hike 2026

Why Gold Import Duty Hike Happened: CAD, Indian Rupee & Middle East Crisis

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है (चीन के बाद). FY26 में भारत ने $71.9 बिलियन (लगभग ₹6 लाख करोड़) का सोना आयात किया – जो पिछले वर्ष की तुलना में 24% अधिक है. हालाँकि, सोने की मात्रा (quantity) 5% घटकर 721 टन रह गई, लेकिन कीमतों में तेज उछाल के कारण मूल्य बढ़ गया. चांदी का आयात और भी चौंकाने वाला रहा – $12 बिलियन, यानी 150% की वृद्धि.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, वेस्ट एशिया संकट (ईरान-इज़राइल तनाव) के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं – ब्रेंट क्रूड $95-105 प्रति बैरल के पार. भारत अपनी तेल आवश्यकता का 85% आयात करता है, इसलिए CAD (करंट अकाउंट डेफिसिट) पर दबाव बनता है. रुपया भी एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में एक है. RBI ने रुपये को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार से हस्तक्षेप किया है – 1 मई 2026 तक भंडार घटकर $690.7 बिलियन (11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त) रह गया.

इसलिए सरकार ने “गैर-आवश्यक आयात” कम करने की रणनीति अपनाई. प्रधानमंत्री मोदी ने 8 मई 2026 को हैदराबाद में कहा था – “देशवासी कम से कम एक साल के लिए सोने की खरीदारी टाल दें.” इसी के बाद 13 मई को ड्यूटी बढ़ोतरी का आदेश आ गया. सरकार ने इसे “विवेकपूर्ण प्रबंधन” (prudent management) करार दिया.

How Much Gold and Silver Became Costlier? एक दिन में इतना उछाल

आयात शुल्क बढ़ने का असर तुरंत दिखा. IBA (Indian Bullion Association) के आंकड़ों के अनुसार:

धातु12 मई 2026 (शुल्क से पहले)13 मई 2026 (शुल्क के बाद)बढ़ोतरी (₹)
24 कैरेट सोना (10 ग्राम)₹1,55,300₹1,61,110+₹5,810
22 कैरेट सोना (10 ग्राम)₹1,42,200 (अनुमान)₹1,47,684+₹5,484
चांदी (1 किलो)₹2,77,000₹2,96,030+₹19,030

MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स (जून डिलीवरी) एक दिन में 6.34% उछलकर ₹1,63,165 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. चांदी के जुलाई फ्यूचर्स में 7% की तेजी आई.

IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के अनुसार, पहले जहां कुल टैक्स (बेसिक + सेस + IGST) प्रति 10 ग्राम लगभग ₹13,500 आता था, अब यह बढ़कर ₹27,000 प्रति 10 ग्राम हो गया है. यानी अब सोना खरीदने वाले को पहले से दोगुना टैक्स चुकाना पड़ेगा.

Market Reaction: ज्वैलरी स्टॉक्स में 11% तक की गिरावट

निवेशकों ने इस फैसले को नकारात्मक लिया, क्योंकि महंगी सोने की कीमतें मांग को कम करेंगी. पिछले तीन दिनों में ज्वैलरी सेक्टर के स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई:

तीन दिनों में ज्वैलरी सेक्टर की कुल मार्केट कैप में लगभग ₹60,000 करोड़ की गिरावट आई. ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि आगे भी दबाव बना रह सकता है.

सोने पर नकारात्मक प्रभाव के बावजूद, MCX पर सोने की कीमतें फ्यूचर्स में बढ़ीं – जो दर्शाता है कि निवेशक आने वाले समय में और ऊंची कीमतों की उम्मीद कर रहे हैं. स्पॉट बाजार में भी भौतिक सोने की कीमतें बढ़ीं.

Industry Reaction: तस्करी, MSME और निर्यात पर तगड़ा प्रहार

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने इस फैसले को “प्रतिगामी कदम” बताते हुए कहा कि इससे तस्करी को बढ़ावा मिलेगा. GJEPC के अनुसार, भारत में सोने की मांग संरचनात्मक (structural) है, न कि चक्रीय. लोग त्योहारों, शादियों और बचत के लिए सोना खरीदते हैं. शुल्क बढ़ाने से मांग कम नहीं होगी, बल्कि ग्रे-मार्केट और तस्करी का द्वार खुलेगा.

सचिन सावरिकर (अर्था भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स) ने कहा – “जब कानूनी चैनल की कीमत इतनी बढ़ जाती है, तो अवैध आपूर्ति अंतराल भर देती है.” पिछली बार जब 2022 में 15% शुल्क लगाया गया था, तो तस्करी के मामले बढ़ गए थे. 2024 के बजट में शुल्क घटाकर 6% किए जाने के बाद तस्करी में गिरावट आई थी – अब फिर से बढ़ोतरी से वही प्रवृत्ति लौट सकती है.

MSME ज्वैलरी निर्माताओं पर असर: GJEPC के 80% सदस्य MSME हैं. उनका कहना है कि इस फैसले से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता चोटिल होगी और निर्यात महंगा हो जाएगा. पिछले वर्ष ज्वैलरी निर्यात में 146% की वृद्धि हुई थी – अब इसके रुकने का खतरा है.

अखिल भारतीय जेम एंड ज्वैलरी काउंसिल के अध्यक्ष राजेश रोकडे ने कहा – “यह फैसला समानांतर अर्थव्यवस्था (parallel economy) को बढ़ावा देगा. सरकार को स्मगलिंग पर लगाम लगानी होगी.”

सेनको गोल्ड के एमडी और सीईओ सुवंकर सेन ने कहा – यह शुल्क संरचना तब तक बनी रहेगी जब तक मिडिल ईस्ट संकट समाप्त नहीं हो जाता – संभवतः एक वर्ष. उनके अनुसार वॉल्यूम 10-15% घट सकता है, लेकिन वैल्यू उच्च बनी रहेगी (क्योंकि सोना स्वयं महंगा है). उपभोक्ता हल्के वजन के आभूषण (light-weight jewellery) खरीदेंगे.

CEPA और Dubai रूट से आयात का बढ़ता रास्ता

GTRI (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) ने चेतावनी दी है कि शुल्क बढ़ोतरी से UAE (दुबई) के रास्ते सोने का आयात बढ़ सकता है. India-UAE CEPA (कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) के तहत, सोने की आयात पर शुल्क सामान्य दर से 1% कम होता है (टैरिफ रेट कोटा के तहत). पहले जब सामान्य दर 6% थी, तो UAE से 5% पर आयात होता था. अब जब सामान्य दर 15% हो गई है, तो UAE से 14% पर आयात संभव होगा – यानी अंतराल 1% से बढ़कर 1% नहीं, बल्कि नए हिसाब से 8% का अंतर बन गया है? GTRI के अनुसार, चांदी पर तो शुल्क 2022 से घटकर 7% (CEPA के तहत) है, जबकि सामान्य शुल्क 15% हो गया – अंतराल 8%.

इससे कारोबारियों के लिए दुबई के रास्ते सोना लाना काफी लाभदायक हो जाएगा, क्योंकि वैध चैनल के मुकाबले कम शुल्क देना होगा. हालाँकि, टैरिफ कोटा सीमित (2027 तक 200 टन) है, फिर भी इसका अधिकतम उपयोग होगा.

Impact on Consumers and Investors: खरीदें, बेचें या रीबैलेंस?

विशाल धवन (प्लान आगे वेल्थ एडवाइजर्स) के अनुसार, यह समय सोने के निवेश को रीबैलेंस करने का है. पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतें काफी बढ़ी हैं – पांच साल में 100% से अधिक. इसलिए कई निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने का वजन बढ़ गया है. वे मुनाफावसूली कर सकते हैं. जो लोग अंडरवेट हैं, वे ऊंची कीमतों पर भी संतुलित तरीके से खरीदारी कर सकते हैं – लेकिन एकमुश्त नहीं, बल्कि SIP या धीरे-धीरे.

बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दरों पर सोने में नया निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि सरकार ने एक वर्ष के लिए मांग कम करने का संदेश दिया है. हालाँकि, वैश्विक स्तर पर सोने के लिए बुलिश कारक बने हुए हैं – अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, मुद्रास्फीति, और भू-राजनीतिक तनाव. इसलिए लॉन्ग टर्म (5-10 वर्ष) में सोना अभी भी एक अच्छा हेज है.

ज्वैलरी खरीदारों के लिए सलाह: यदि आप शादी या त्योहार के लिए सोना खरीद रहे हैं, तो भाव और उछल सकते हैं. कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ महीने इंतजार करें, संभव है कि सरकार द्वारा मांग घटने के बाद कीमतें थोड़ी स्थिर हों. लेकिन अगर खरीदना जरूरी हो तो पुराने गहनों की अदला-बदली (exchange) का विकल्प चुनें – इससे टैक्स का बोझ कम पड़ता है. मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद के अनुसार, आने वाले समय में “एक्सचेंज” खरीदारी का प्रमुख तरीका बन जाएगा.

Social Media और बाजार में हलचल: क्या उम्मीद करें?

X #GoldDutyHike, #GoldPriceSurge, #PMOAppeal ट्रेंड कर रहे हैं. निवेशक और एनालिस्ट दो खेमों में बंटे हैं:

भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के बीच तालमेल भी चर्चा में है. पिछले कुछ हफ्तों में RBI ने रुपये को स्थिर रखने के लिए कई अन्य कदम उठाए हैं – फॉरेक्स ट्रेडिंग पर प्रतिबंध, इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात पर नियंत्रण, आदि. अब सोने पर शुल्क उन्हीं का हिस्सा है.

क्या सोने की मांग वाकई घटेगी? आंकड़े क्या कहते हैं?

पिछले अनुभव बताते हैं कि सोने पर टैक्स बढ़ाने से मांग में थोड़ी कमी आती है, लेकिन उतनी नहीं जितनी सरकार को उम्मीद होती है. 2022 में जब शुल्क 15% किया गया था (तब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद), तो सोने की आयात मात्रा में गिरावट आई थी, लेकिन मूल्य बढ़ गया था. 2024 में शुल्क घटने के बाद मांग फिर बढ़ गई.

IBJA के अनुसार, इस बार सोने की मांग 10-15% गिर सकती है. लेकिन यह अनुमान तब है जब सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिर रहें. यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें और बढ़ीं, तो मांग और गिर सकती है. एसेंटियल कंज्यूमर (शादी-त्योहार) पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए सोना अनिवार्य है. लेकिन निवेश की खरीदारी (सिक्के, बार, ETF) में कमी आ सकती है.

सिल्वर का मामला: चांदी पर 150% आयात वृद्धि के बाद सरकार ने उस पर भी शुल्क बढ़ा दिया. अब चांदी भी महंगी हो गई है. औद्योगिक मांग (इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल) प्रभावित हो सकती है, लेकिन कीमतें पहले से ही ऊंची हैं.

Final Summary: Gold Import Duty Hike 2026

विवरणजानकारी
पुरानी बेसिक ड्यूटी5% (कुल प्रभावी 9.2% IGST सहित)
नई बेसिक ड्यूटी10% (बढ़ाकर)
पुराना AIDC1% (कुल प्रभावी शुल्क 6% बिना IGST)
नया AIDC5% (बिना IGST कुल 15%)
नया प्रभावी कर (IGST सहित)18.4%
सोने की कीमत (दिल्ली, 13 मई 2026)₹1,61,110/10 ग्राम (24 कैरेट)
एक दिन में सोने की बढ़ोतरी₹5,810 प्रति 10 ग्राम
चांदी की कीमत₹2,96,030 प्रति किलो
MCX गोल्ड फ्यूचर्स₹1,63,165 (+6.34%)
आवेदन तिथि13 मई 2026 (मध्यरात्रि से)
कारणवेस्ट एशिया संकट, CAD, रुपया, PM मोदी की अपील
अपेक्षित मांग में गिरावट10-15% (IBJA)
ज्वैलरी स्टॉक्स की गिरावट1.6% से 11% (तीन दिनों में)
UAE CEPA के तहत शुल्कसोना 14%, चांदी 7% (सामान्य 15% से 1-8% कम)
तस्करी का खतराउच्च (उद्योग के अनुसार)
निर्यात पर प्रभावMSME निर्माताओं पर नकारात्मक

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Akash Maurya

Akash Maurya is the founder and author of Government CSC. He holds a B.Tech degree in Civil Engineering and has a strong interest in helping aspirants stay informed about government job opportunities. With a clear understanding of the challenges faced by job seekers, he focuses on providing accurate and well-structured information related to recruitment updates, eligibility, and application processes.

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