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UAE का बड़ा कदम Strait of Hormuz को Bypass करने के लिए New Oil Pipeline का काम तेज, 2027 तक Export Capacity होगी दोगुनी
United Arab Emirates (UAE) ने अपने तेल निर्यात को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. Strait of Hormuz में चल रहे संकट के बीच, Abu Dhabi के Crown Prince Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan ने ADNOC को एक दूसरी पाइपलाइन का निर्माण तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है. इस पाइपलाइन को West-East Pipeline Phase 2 कहा जाता है. यह Fujairah बंदरगाह से UAE की तेल निर्यात क्षमता को दोगुना कर देगी, और पूरी तरह से Strait of Hormuz को बायपास कर देगी.
मौजूदा Habshan-Fujairah पाइपलाइन (ADCOP) पिछले कुछ महीनों से UAE के लिए जीवन रेखा बनी हुई है, लेकिन इसकी क्षमता केवल 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन है. नई पाइपलाइन 2027 तक चालू हो जाएगी और इसमें 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल per day की अतिरिक्त क्षमता होगी.
इससे Hormuz से बाहर UAE की कुल निर्यात क्षमता 3 से 3.6 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी, जो देश की कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 75 प्रतिशत है.
Strait of Hormuz एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जो Iran और Oman के बीच स्थित है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है. 28 फरवरी 2026 को जब America और Israel ने Iran पर हमला किया, तो Iran ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया. Iran ने अपने नियंत्रण क्षेत्र को 300 मील (लगभग 500 किलोमीटर) तक बढ़ा दिया. इस क्षेत्र में UAE का अधिकांश तटीय क्षेत्र और Fujairah बंदरगाह भी आ गया.
तब से Iran ने तेल टैंकरों पर हमले किए हैं, Fujairah की भंडारण सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए हैं, और कई जहाजों को रोक दिया है. इसके परिणामस्वरूप, UAE का तेल उत्पादन लगभग 3.4 मिलियन बैरल प्रति दिन से घटकर 1.8 से 2.1 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है. UAE अभी भी तेल निर्यात कर पा रहा है, वह केवल मौजूदा Habshan-Fujairah पाइपलाइन की वजह से है.
दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू गई हैं. कई देशों में ईंधन राशनिंग शुरू हो गई है, और महंगाई एक बड़ी चिंता बन गई है. वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर आपूर्ति संकट का सामना कर रही है.
Abu Dhabi Crude Oil Pipeline, जिसे ADCOP या Habshan-Fujairah पाइपलाइन के नाम से जाना जाता है, वर्ष 2012 में चालू हुई थी. यह एक दूरदर्शी परियोजना थी, जिसे Persian Gulf के बाहर एक वैकल्पिक निर्यात मार्ग प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था. यह पाइपलाइन Abu Dhabi के Habshan तेल क्षेत्रों से Gulf of Oman पर स्थित Fujairah बंदरगाह तक 360 किलोमीटर (लगभग 224 मील) लंबी है.
ADCOP की मुख्य विशेषताएं:
मौजूदा संकट के दौरान, ADCOP लगभग अपनी पूरी क्षमता पर चल रही है. इसने UAE को भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई खरीदारों को तेल निर्यात जारी रखने की अनुमति दी है, भले ही जलडमरूमध्य बड़े पैमाने पर बंद है. हालाँकि, अधिकतम 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता के साथ, यह UAE के तेल क्षेत्रों के पूर्ण उत्पादन (जो 4.85 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक है) को संभाल नहीं सकती है.
15 मई 2026 को, Abu Dhabi के Crown Prince ने ADNOC को West-East Pipeline परियोजना को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया. यह दूसरी पाइपलाइन मौजूदा ADCOP के समानांतर Habshan से Fujairah तक चलेगी. इसकी क्षमता भी 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन होगी.
इस पाइपलाइन का निर्माण पहले से ही चल रहा था, लेकिन मूल समाप्ति तिथि सार्वजनिक नहीं थी. नए निर्देश का लक्ष्य पाइपलाइन को वर्ष 2027 तक चालू करना है.
एक बार पूरा होने के बाद, Hormuz से बाहर UAE की कुल निर्यात क्षमता दोगुनी होकर 3 से 3.6 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी. इससे UAE अपना अधिकांश कच्चा तेल बिना किसी Iranian हस्तक्षेप के निर्यात कर सकेगा.
दूसरी पाइपलाइन को तेजी से पूरा करने के फैसले से UAE को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे.
सबसे तात्कालिक लाभ ऊर्जा सुरक्षा है. दोनों पाइपलाइनों के पूरी क्षमता पर चलने से UAE 3.6 मिलियन बैरल प्रति दिन तक तेल निर्यात कर सकेगा, भले ही Strait of Hormuz पूरी तरह से बंद हो. यह देश को Iranian खतरों और नाकेबंदी से लगभग अभेद्य बना देता है.
UAE पहले ही OPEC से बाहर निकल चुका है, जिससे वह उत्पादन कोटा से मुक्त हो गया है. उसकी उत्पादन क्षमता 2027 तक 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकती है. नई पाइपलाइन के साथ, उसके पास उस उत्पादन से मेल खाने के लिए निर्यात बुनियादी ढांचा होगा. इसका मतलब है कि UAE अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा सकता है और तेल बिक्री से अधिक राजस्व उत्पन्न कर सकता है.
Fujairah बंदरगाह पहले से ही एक प्रमुख भंडारण और रिफाइनिंग केंद्र है. दोगुनी पाइपलाइन क्षमता के साथ, यह और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा. तेल व्यापारी और खरीदार Fujairah को संघर्ष क्षेत्र के बाहर एक विश्वसनीय लोडिंग प्वाइंट के रूप में देखेंगे. यह बदलाव वैश्विक तेल लॉजिस्टिक्स को स्थायी रूप से बदल सकता है.
UAE को अब जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए Iran से बातचीत करने की आवश्यकता नहीं है. उसने एक स्थायी विकल्प बना लिया है. यह UAE को क्षेत्र में अधिक कूटनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता देता है.
भारत UAE से कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है. युद्ध से पहले, भारत UAE क्रूड की महत्वपूर्ण मात्रा खरीदता था. Strait of Hormuz के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी.
15 मई 2026 को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान, भारत और UAE ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए. UAE भारत के Strategic Petroleum Reserves (ISPRL) में 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगा. यह भारत को एक बफर स्टॉक देता है जिसका उपयोग आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में किया जा सकता है.
एक बार दूसरी पाइपलाइन चालू हो जाने के बाद, UAE Fujairah से समुद्री मार्गों के माध्यम से भारत को अधिक तेल भेज सकेगा जो जलडमरूमध्य से बचते हैं. जहाज Fujairah से लोड हो सकते हैं और सीधे मुंद्रा, जामनगर और विजाग जैसे भारतीय बंदरगाहों पर जा सकते हैं. यह मार्ग पूरी तरह से Iran के नियंत्रण वाले क्षेत्र से बाहर है.
भारत सरकार दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध बढ़ाने के लिए UAE के साथ बातचीत भी कर रही है. नई पाइपलाइन के साथ, UAE बड़ी और अधिक स्थिर मात्रा के लिए प्रतिबद्ध हो सकता है.
जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से वैश्विक तेल बाजार बेहद अस्थिर रहा है. फास्ट-ट्रैक पाइपलाइन की घोषणा ने पहले ही आशंकाओं को कम करना शुरू कर दिया है. जब पाइपलाइन 2027 में ऑनलाइन आएगी, तो यह चोकप्वाइंट के बाहर बाजार में आपूर्ति की एक महत्वपूर्ण मात्रा जोड़ देगी, जिससे कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी.
Saudi Arabia के पास भी एक पाइपलाइन है जो Strait of Hormuz को बायपास करती है. इसकी East-West पाइपलाइन पूर्वी क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के Yanbu बंदरगाह तक ले जाती है. Saudi Aramco के पास इस पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 7 मिलियन बैरल प्रति दिन ले जाने की क्षमता है, हालांकि इसका सभी निर्यात के लिए उपयोग नहीं किया जाता है.
Saudi Arabia की पाइपलाइन मौजूदा संकट के दौरान एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा रही है. हालाँकि, UAE की नई पाइपलाइन उसे समान स्तर की रणनीतिक स्वतंत्रता देगी. Saudi Arabia के विपरीत, जो अभी भी कुछ निर्यात के लिए जलडमरूमध्य पर निर्भर है, UAE जल्द ही अपना लगभग सारा तेल Fujairah के माध्यम से निर्यात कर सकेगा.
अन्य खाड़ी देशों जैसे Kuwait, Qatar और Bahrain के पास कोई बायपास पाइपलाइन नहीं है. वे पूरी तरह से Strait of Hormuz पर निर्भर हैं. यह उन्हें Iranian कार्यों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है.
ADNOC ने West-East Pipeline Phase 2 की सटीक लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह कई अरब डॉलर है. इस परियोजना में लगभग 360 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाना, पंपिंग स्टेशन बनाना, और Fujairah में भंडारण सुविधाओं का विस्तार करना शामिल है.
UAE के पास महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन हैं. 2026-2028 के लिए ADNOC की पूंजीगत व्यय योजना लगभग 55 बिलियन डॉलर है. पाइपलाइन विस्तार इस व्यापक निवेश रणनीति में फिट बैठता है.
पाइपलाइन का निर्माण ADNOC के अनुबंध के तहत अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग फर्मों द्वारा किया जा रहा है. त्वरित समयरेखा का मतलब है कि परियोजना को मूल कार्यक्रम से पहले पूरा करने के लिए अधिक श्रमिकों और उपकरणों को तैनात किया जाएगा.
| Timeline | Work |
|---|---|
| 2026 | दूसरी पाइपलाइन का निर्माण चल रहा है. ADNOC 2027 की समयसीमा को पूरा करने के लिए काम में तेजी ला रहा है. |
| 2027 | West-East Pipeline Phase 2 चालू होने की उम्मीद है. Fujairah के माध्यम से UAE की कुल निर्यात क्षमता दोगुनी होकर 3.6 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी. |
| 2027 के बाद | UAE अपनी तेल उत्पादन क्षमता को 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने की योजना बना रहा है. नई पाइपलाइन इस तेल के अधिकांश को Strait of Hormuz के बाहर निर्यात करने की अनुमति देगी. |
हालांकि पाइपलाइन एक प्रमुख रणनीतिक संपत्ति है, फिर भी कुछ चुनौतियां हैं.
Iran पहले ही Fujairah क्षेत्र पर ड्रोन से हमला कर चुका है. UAE के पास वायु रक्षा प्रणाली और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन है, लेकिन आगे के हमलों का जोखिम बना हुआ है. पाइपलाइन और बंदरगाह की सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता होगी.
तेल पाइपलाइनों में रिसाव और फैल का खतरा होता है. पाइपलाइन रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है. ADNOC को उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और त्वरित प्रतिक्रिया योजना बनाने की आवश्यकता होगी.
यदि युद्ध समाप्त हो जाता है और Strait of Hormuz फिर से खुल जाता है, तो पाइपलाइन की पूरी क्षमता की आवश्यकता नहीं हो सकती है. हालाँकि, UAE पाइपलाइन को एक दीर्घकालिक बचाव के रूप में देखता है, न कि केवल एक अस्थायी समाधान के रूप में. भले ही जलडमरूमध्य फिर से सुरक्षित हो जाए, एक बायपास विकल्प होने से UAE को बातचीत की ताकत और परिचालन लचीलापन मिलता है.
UAE का दूसरी Habshan-Fujairah पाइपलाइन को तेजी से पूरा करने का निर्णय वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में एक ऐतिहासिक कदम है. 2027 तक, देश बिना Strait of Hormuz से गुजरे 3.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल प्रति दिन निर्यात करने में सक्षम हो जाएगा. यह अपनी अर्थव्यवस्था को Iranian खतरों से बचाएगा, वैश्विक तेल बाजारों को स्थिर करेगा, और भारत जैसे एशियाई खरीदारों को विश्वसनीय आपूर्ति प्रदान करेगा.
भारत के लिए, यह विशेष रूप से अच्छी खबर है. UAE पहले से ही एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार है. नई pipeline और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व समझौते के साथ, भारत की ऊर्जा सुरक्षा में काफी वृद्धि होगी.
यह pipeline सिर्फ एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है. यह रणनीतिक स्वतंत्रता और दीर्घकालिक योजना का एक बयान है. जैसे-जैसे दुनिया बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का सामना कर रही है, UAE ने दिखाया है कि कमजोरी को ताकत में कैसे बदला जा सकता है.
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