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नमो ड्रोन दीदी योजना 2026
गांव की महिलाएं बन रही हैं ड्रोन पायलट
भारत सरकार ने 30 नवंबर 2023 को एक ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की. नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 अब देश भर में तेजी से विस्तार कर रही है. इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन मिल रहे हैं और वे किसानों को सेवाएं देकर अच्छी आमदनी कर रही हैं.
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए 1,261 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. योजना का लक्ष्य 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराना है. यह योजना दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित हो रही है.
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आप कैसे इस योजना का लाभ उठा सकती हैं, कितनी कमाई हो सकती है, और आवेदन की क्या प्रक्रिया है.
नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक से लैस करना है. इस योजना के तहत चयनित महिला समूहों को कृषि ड्रोन मिलते हैं जिनसे वे किसानों के खेतों में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव करती हैं.
योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की थी. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी कौशल देना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. योजना के तहत प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय उत्पन्न करने का लक्ष्य दिया गया है.
योजना का संचालन कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है. लीड फर्टिलाइजर कंपनियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. अब तक सैकड़ों ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं और प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार जारी हैं.
नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 में महिलाओं को कई प्रकार की वित्तीय सहायता मिलती है. यहां विस्तार से जानें:
सरकार ड्रोन की लागत का 80 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है. अधिकतम सब्सिडी राशि 8 लाख रुपये प्रति स्वयं सहायता समूह तय की गई है. एक कृषि ड्रोन की कीमत लगभग 8 से 10 लाख रुपये होती है. इसका मतलब है कि महिलाओं को बहुत कम राशि खुद निवेश करनी पड़ती है.
शेष 20 प्रतिशत राशि के लिए कृषि अवसंरचना कोष से ऋण सुविधा उपलब्ध है. इस ऋण पर केवल 3 प्रतिशत की ब्याज दर लगती है. यह बहुत कम ब्याज दर है जो समूहों पर बोझ कम करती है.
ड्रोन पैकेज में केवल ड्रोन ही नहीं बल्कि कई अन्य उपकरण भी शामिल हैं:
प्रत्येक चयनित समूह को 15 दिन का व्यापक प्रशिक्षण मिलता है. इसमें 5 दिन का अनिवार्य ड्रोन पायलट प्रशिक्षण और 10 दिन का कृषि अनुप्रयोग प्रशिक्षण शामिल है. प्रशिक्षण के बाद डीजीसीए यानी नागर विमानन महानिदेशालय से रिमोट पायलट सर्टिफिकेट जारी होता है.
एक अन्य सदस्य या परिवार का सदस्य ड्रोन सहायक के रूप में 5 दिन का प्रशिक्षण ले सकता है. इसमें मरम्मत, विद्युत कार्य और रखरखाव की जानकारी दी जाती है.
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नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं. यहां विस्तार से समझें:
आवेदक महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य होनी चाहिए. समूह दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत होना चाहिए. समूह कृषि गतिविधियों में लगा हो या किसानों से जुड़ा होना चाहिए.
कुछ राज्यों में अतिरिक्त शर्तें हैं. उदाहरण के लिए हरियाणा में आवेदक की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और कक्षा 10 पास होना अनिवार्य है. वैध पीपीपी आईडी भी जरूरी है.
आवेदन प्रक्रिया को कागजी कार्रवाई कम रखने के लिए डिजाइन किया गया है. यहां चरणबद्ध प्रक्रिया है:
राज्य स्तरीय समिति आवेदन की जांच करती है और पात्रता सत्यापित करती है. स्वीकृति मिलने पर प्रशिक्षण और ड्रोन पैकेज का आवंटन होता है.
नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 की सबसे बड़ी आकर्षण यह है कि इसमें अच्छी कमाई की संभावना है. यहां वास्तविक आंकड़े देखें:
प्रति एकड़ स्प्रे का चार्ज 400 से 600 रुपये तक होता है. एक दिन में 5 से 8 एकड़ आसानी से कवर किया जा सकता है. इस हिसाब से रोज की कमाई 2000 से 4000 रुपये तक हो सकती है.
ऑफ सीजन में महीने की कमाई 15,000 से 30,000 रुपये रहती है. पीक सीजन में यह बढ़कर 60,000 से 1,00,000 रुपये प्रति महीना हो जाती है. योजना का लक्ष्य प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय दिलाना है.
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले की रीना चंदेल इस योजना से जुड़ीं. उन्होंने इंदौर और भोपाल में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया. अब वे किसानों के खेतों में नैनो यूरिया और नैनो पेस्टिसाइड का छिड़काव करती हैं. एक कृषि सीजन में वे 40,000 रुपये से ज्यादा की आमदनी कर लेती हैं और साल भर में यह आय 1 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
ग्वालियर की निधा अख्तर की कहानी और भी प्रेरणादायक है. उन्होंने मोहना और आसपास के गांवों के 325 किसानों के खेतों में 2250 एकड़ से अधिक रकबे पर ड्रोन से नैनो उर्वरक का छिड़काव किया. एक साल से भी कम समय में उन्होंने लगभग 3.5 लाख रुपये की कमाई की. अमेरिका के काउंसिल जनरल माइक हैंकी ने भी उनसे मुलाकात की और ड्रोन तकनीक के बारे में जानकारी ली.
कर्नाटक में भी योजना अच्छा प्रदर्शन कर रही है. शिवमोग्गा जिले की आशा रानी ने जनवरी 2024 में मैसूर में प्रशिक्षण लिया. वे बताती हैं कि साल में 4 से 5 महीने काम मिलता है और कभी-कभी महीने की कमाई 1 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.
नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 पूरे देश में लागू है लेकिन कुछ राज्यों में इसने विशेष सफलता पाई है. यहां राज्यवार प्रशिक्षण आंकड़े देखें:
कर्नाटक देश में सबसे आगे है. यहां 145 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ड्रोन पायलट प्रशिक्षण मिल चुका है. इस मामले में कर्नाटक का स्थान पहला है. उत्तर प्रदेश 128 प्रशिक्षित महिलाओं के साथ दूसरे स्थान पर है. आंध्र प्रदेश 108 प्रशिक्षित महिलाओं के साथ तीसरे स्थान पर है.
कर्नाटक में कोप्पल जिला सबसे आगे है जहां 13 समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण मिला. कलबुर्गी में 11 और मंड्या में 11 महिलाओं ने प्रशिक्षण पूरा किया. यह आंकड़े बताते हैं कि योजना ग्रामीण स्तर पर पहुंच रही है.
ड्रोन सिर्फ कमाई का साधन नहीं बल्कि कृषि क्रांति का हथियार भी है. इसके कई फायदे हैं:
नमो ड्रोन दीदी योजना 2026 सिर्फ शुरुआत है. आगे और भी अवसर खुल रहे हैं:
भविष्य में एआई और ड्रोन का एकीकरण होगा. क्रॉप मॉनिटरिंग स्वचालित होगी. ड्रोन से बीज बोने की तकनीक भी आ रही है. यह सुविधाएं और कमाई के रास्ते खोलेंगी.
भारत का कृषि ड्रोन बाजार 2024 में 243.60 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2033 तक 2,110.60 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. यह 24.10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर है. इस वृद्धि में ड्रोन दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
बजट 2026 में महिला सशक्तिकरण के लिए कई घोषणाएं हुई हैं. लखपति दीदी कार्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है. स्वयं सहायता उद्यमी बाजार यानी एसएचई मार्ट्स खोले जा रहे हैं. दीनदयाल अंत्योदय योजना के लिए बजट 17,280 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है.
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